An Early World Traveler: al-Baruni

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Tale of a world traveler

प्राचीन काल में यात्री बहुत यात्राये किया करतेे थे। ये यात्रायें व्यापार, धर्म, राज्य और रोजगार, आदि विषयों पर आधारित होती थी। उस काल में स्थापत्य के आधार पर नगरों का ख्याति होती थी। कई विद्वान और यात्री नयी संस्कृति और सभ्यताओं के अध्ययन के लिये दूसरे नगरों और शहरों की यात्रायें किया करते थे और इन्ही में से एक यात्री अल-बरुनी था।
In ancient times, traveler used to travel a lot. These tours were based on subjects like trade, religion, state and employment, etc.

In those times, cities were famous on the basis of architecture. Many scholars and travelers used to travel to other cities and cities to study new culture and civilizations, and one of these travelers was al-Baruni.

About a world traveler

यात्री अल बरुनी एक विद्वान यात्री था। यात्री अल बरुनी का जन्म आधुनिक उज्बेकिस्तान में स्थित ख़्वारिज़्म में सन् 973 में हुआ था। ख्वारिज्म शिक्षा का एक महत्वपूर्ण केन्द्र था और यात्री अलबरुनी ने उस समय उपलब्ध सबसे अच्छी शिक्षा प्राप्त की। यात्री अलबरुनी कई भाषाओं का ज्ञाता था और यूनानी दार्शनिकों के कार्यों से भली भाॅति परिचित था, जिन्हें उसने अरबी अनुवादों में पढा था। 1017ई0 में ख्वारिज्म पर आक्रमण के पश्चात सुल्तान महमूद यहाॅ के कई कवियों और विद्वानों को अपनी राजधानी गजनी ले गया। यात्री अलबरुनी भी उनमें से एक था। यात्री अलबरुनी को यह शहर पसन्द आया और उसने अपना जीवन यहीं बिताया।

Traveler Al Baruni was a learned traveler. He was born in 973 in Khwarism, located in modern-day Uzbekistan. Khwarism was an important center of education and Traveler Al Baruni received the best education available at that time. He was a master of many languages and well acquainted with the works of Greek philosophers, whom he had studied in Arabic translations. After the invasion of Khwarism in 1017 AD, Sultan Mahmud took many of the poets and scholars to his capital Ghazni. Traveler Al Baruni was also one of them. The Traveler Al Baruni liked this city and spent his life here.

a traveler’s interest

गजनी में ही यात्री अलबरुनी को भारत देश के प्रति रुचि महसूस हुई। उस समय यह एक सामान्य बात थी। आठवीं शताब्दी से ही यात्रियों द्वारा संस्कृत में रचित खगोल विज्ञान, गणित और चित्रकला संबंधी कार्यों का अरबी भाषा में अनुवाद होने लगा था। पंजाब के गजनबी साम्राज्य में मिल जाने के बाद यात्री अलबरुनी को पंजाब के साथ ही उत्तर भारत के राज्यों में यात्रा करने का मौका मिला। यहाॅ ब्राह््मणों, पुरोहितों और विद्वानों के साथ कई वर्ष बिताकर यात्री अलबरुनी ने संस्कृत धर्म तथा दर्शन का ज्ञान अर्जित किया।

In Ghazni itself, traveler Al Baruni felt interest in the country of India. At that time it was a normal thing. From the eighth century onwards, astronomy, mathematics and painting works in Sanskrit were translated into Arabic by travelers. After joining Punjab’s Ghaznabi empire, the Traveler Al Baruni got a chance to travel in the states of Punjab as well as North India. The Traveler Al Baruni, after spending many years with Brahmins, priests and scholars, acquired knowledge of Sanskrit religion and philosophy.

a travelers travelogue

यात्री अलबरुनी ने अरबी भाषा में किताब-उल-हिन्द नामक एक किताब लिखी। यह किताब धर्म, दर्शन, त्योहारों, खगोल विज्ञान, कीमिया, रीति रिवाजों, प्रथाओं, सामाजिक जीवन, भार तौल, मापन विधियों, मूर्तिकला, कानून, मापन यन्त्र, विज्ञान आदि विषयों के आधार पर अस्सी अध्यायों में विभाजित है।
यात्री अलबरुनी ने लेखन में अरबी भाषा का प्रयोग किया था। संभवतया उसने अपनी कृतियाॅ उपमहाद्वीप के सीमान्त क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिये लिखी थी।

Traveler Al Baruni wrote a book in Arabic language called Kitab-ul-Hind. The book is divided into eighty chapters on topics of religion, philosophy, festivals, astronomy, alchemy, customs, practices, social life, weight, measurement methods, sculpture, law, measuring instruments, science etc.
The Traveler Al Baruni used the Arabic language in writing. Probably he wrote his work for people living in the border areas of the subcontinent.

Traveler’s Perspective

अलबरुनी के द्वारा लिखी गई किताबें यात्राओं पर ही आधारित हैं। यह एक रूप से यात्रा वृतांत ही है। वह एक विद्वान यात्री था, जिसने अपने ज्ञान में वृद्धि के लिये यात्राओं का मार्ग चुना। यात्री अलबरुनी के काल में अपनी जरुरतों के लिये यात्रा करना स्वाभाविक था। यात्री अलबरुनी से पूर्व भी कई विदेशी भारत की ओर यात्रा कर चुके थे। परन्तु यात्री अलबरुनी ने अपनी यात्रा को एक खूबसूरत किताब का रुप दिया। ताकि भविश्य में देश विदेश के ज्ञान को आसानी से ग्रहण किया जा सके।

Books written by Traveler Al Baruni are based on travel. It is a travelogue in one form. He was a learned traveler, who chose the way of travel to increase his knowledge. It was natural for the traveler to travel for his needs during the time of Traveler Al Baruni. Travelers had traveled to India many times before Traveler Al Baruni. But the Traveler Al Baruni, described his journey as a beautiful book. So that in future the knowledge of foreign country can be easily absorbed.

conclusion

यात्री अलबरुनी की रचनाएं साक्षी हैं। यात्रा करना प्राचीन काल से ही न केवल भरण-पोषण का उपाय रहा है बल्कि ज्ञान के विकास में भी सहायक रहा है।

The compositions of Traveler Al Baruni bear witness. Traveling since ancient times has not only been a means of maintenance but has also been helpful in the development of knowledge.

वास्तव में विश्व यात्री बनना आसान नहीं है।

Actually it is not easy to become a world traveler.

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