मेरे सपनों का भारतवर्ष-11points

मेरे सपनों का भारतवर्ष-11points, mere sapno ka bharatvars-11 points

मेरे सपनों का भारतवर्ष mere sapno ka bharatvars को मैंने किसी एक दिन सपने में नहीं देखा। मेरे सपनों का भारतवर्ष mere sapno ka bharatvars तो वह सपना है। जिसे हमारे देश का प्रत्येक नागरिक खुली आँखों से देखता है।

प्रत्येक देश का निवासी अपने देश पर प्राण न्यौछावर करने को तत्पर रहता है। वह अपने देश को ही श्रेष्ठ मानता है। मेरे सपनों का भारतवर्ष-11points mere sapno ka bharatvars-11points. मैं भी अपने देश से प्रेम करता हॅू और कह सकता हॅू-

“सम्पूर्ण देशों से अधिक जिस देश का उत्कर्ष है
वह देश मेरा देश, वह देश भारतवर्ष है।”

जब संसार में सभ्यता का विकास भी नहीं हुआ था] तब भारत के ऋषियों ने गहन ज्ञान पर आधारित वेद जैसे ग्रन्थों की रचना कर डाली थी। उन्होंने घने वनों में, नदी के तट पर, या पर्वतों की गुफाओं का अपना घर बनाया। कंदमूल फल खाकर, जीवन व्यतीत किया। सरल एवं सादा जीवन में मनुष्य के मन को ज्ञान के प्रकाश से आलोकित किया था।

मेरे सपनों का भारतवर्ष mere sapno ka bharatvars
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आध्यात्मिक रूप से ही नहीं भौतिक रूप से भी भारत सम्पन्न देश रहा है। प्राचीन काल में तो भारत सोने की चिड़िया कहलाता था। विज्ञान, ज्योतिष, नक्षत्र विद्या, गणित, चिकित्सा शास्त्र, अर्थशास्त्र आदि विषयों के विद्वानों ने भारत की पावन धरती पर ही जन्म लिया था। उन्होंने अनेक देशों की सभ्यता और ज्ञान की शिक्षा भी दी थी।

मेरे देश का नाम भारत प्रतापी राजा दुष्यंत और शकुन्तला के पुत्र भरत के नाम पर पडा। भारत प्राचीनकाल से ही एक महान देश रहा है। हमें अपने इस महान देश के प्रति कृतज्ञ होना चाहिये। कविवर नीरज ने भारत-भूमि के सम्बन्द्ध में लिखा है-

“रही जहाँ पर नित्य विहरती मधु की बेला
अंचल-अंचल नित्य नवामोदों से खेला
जिसका गौरव के लिए यहीं, निज अंचल भारती
अखिल धरा पर यहीं सभ्यताओं की धरती।”

मेरे सपनों का भारतवर्ष, मेरा गौरवशाली भारत-

मेरा देश एक विशाल देश है। इसमें 28 राज्य और 9 केन्द्र शासित प्रदेश हैं। हमारे देश भारत में विभिन्न जातियों के लोग रहते हैं। भारत के उत्तर में हिमालय और दक्षिण में हिंद महासागर है। भारत कृषि प्रधान देश है। यहाॅ गेंहू, मक्का, ज्वार, बाजरा, चना, धान, गन्ना आदि की फसलें होती हैं। भारत में ही पृथ्वीराज चैहान, चन्द्रगुप्त, अशोक, विक्रमादित्य आदि वीर पुरुषों ने जन्म लिया है। हरिद्वार, काशी, मथुरा, द्वारका, प्रयाग, अजमेर आदि भारत के पावन तीर्थस्थल हैं।

यहाॅ अनेक दर्शनीय स्थल भी हैं। स्वामी विवेकानन्द, स्वामी दयानन्द, महात्मा गाॅधी, भगत सिंह, रामकृष्ण परमहंस, चन्द्रशेखर आजाद, शिवाजी, गुरु गोविन्द सिंह आदि पुरुषों ने भारत को श्रेष्ठ कर्मों की सुगन्ध से महकाया है। यहाॅ पर तेल, गैस, लोहा, कोयला, हीरे और सोने आदि की विशाल खानें और विपुल भण्डार हैं। यह पूर्णरूप से समृद्ध और समुन्नत देश है। मेरे सपनों का भारतवर्ष-11points mere sapno ka bharatvars-11points

आधुनिक भारत

mere sapno ka bharatvars प्राचीन काल में हमारा देश विदेशी आक्रमणकारियों का गुलाम था। कई विदेशी शासकों ने हमारे देश को लूटना भी चाहा। हमारा देश उनके चंगुल से छूटा भी न था कि यहाॅ पर अंग्रजों का आधिपत्य हो गया। हमारे वीर स्वतन्त्रता सैनानियों के निरंतर संघषो ंके पश्चात् हमारा देश गुलामी से आजाद हुआ और धीर-धीरे प्रगति की ओर अग्रसर होने लगा।

india of my dreams आजादी के कई सालों बाद हमारे देश ने विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाई है। पुनः हम सभी अपने खोये हुए स्वाभिमान को ढूॅढ रहे है। किन्तु आज हम देखते हैं कि हमने प्रगति तो की है, पर भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, जनसंख्या, प्रदूषण, जातिवाद, से हम स्वयं ही अपना विनाश करने पर भी तुले हुये हैं।

मेरा देश और मेरे सपने-

यह भारत कोई नया भारत नहीं है। यह तो वही पुराना जगतगुरु है जिससे प्रत्येक देश, समाज, और व्यक्ति शिक्षा लेता था। प्रत्येक भारतवासी जो अपने देश से प्यार करता है और इसके प्रति यही सपना देखता है कि भारत में पुनः रामराज्य की स्थापना हो।

पुराने समय में सोने की चिडिया कहलाने वाला हमारा देश एक बार फिर से अपनी पुरानी पहचान प्राप्त करे। हमारा राष्ट्र विश्व के लिये एक पथ प्रदशक के रूप में जाना जाये। मैं भी अपने भारत के सुखमय भविष्य के सपने देखता हॅू। मैंने भावी भारत के लिये कुछ सपने संजोये हैं। जिनमें मैंने भव्य एवं महान भारत की तस्वीर देखी है। मैं भावी भारत के सपने कुछ इस तरह देखता हॅू।

राजनैतिक उत्कर्ष-

मेरे सपनों के भारत में मैं चाहता हॅू कि लोकतन्त्र केवल सुन्दर अर्थ और परिभाषा को ही समेटे हुए न हो। बल्कि मेरे सपनों के भारत में मैं चाहता हॅू कि लोकतन्त्र की भावना भारत के प्रत्येक नागरिक की खून में बहती रहे। मेरा भारत जन-जन के लिये मंगलकारी और लोकतान्त्रिक दृष्टि से विश्व का सर्वश्रेष्ठ राष्ट्र बने। जन-जन में राजनैतिक जागरुकता उत्पन्न हो। देश का प्रत्येक नागरिक राष्ट्रहित के सम्बन्ध में सोचे और कार्य करे। नागरिकों में और राजनेताओं में परस्पर सद्भाव स्थापित हो।

राजनीति का उद्देश्य केवल भौतिकी करण का विकास ही नहीं बल्कि सांस्कृतिक और वैश्विक विकास भी हो। चारों और विश्व शान्ति के गीत गुंजायमान हों। मेरे सपनों का भारतवर्ष-11points mere sapno ka bharatvars-11points

राष्ट्रीय एकता-

हमारे देश में विभिन्न धर्मों और जातियों के लोग रहते हैं। उनमें धार्मिक और साम्प्रदायिक झगडे होते रहते हैं। सवत्र जातिवाद फैला हुआ है। ऐसा प्रतीत होता है जैसे हमारे राष्ट्र के नागरिक राष्ट्रीय एकता के महत्व को पूर्णतः विस्मृत कर चुके हैं।

मैं भविष्य के उस भारत के सपने देखता हॅू जब भारत से जातिवाद और साम्प्रदायिकता पर आधारित झगडों का पूर्णतः अन्त हो जायेगा। जब भाषा के आधार पर किसी नागरिक का विरोध नहीं होगा। सम्पूर्ण देश एकता के सूत्र से बंधा होगा। मेरे सपनों का भारत में सभी लोग मेलजोल से रहेंगे, और सब कहेंगे-

“मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना
हिन्दी है हम वतन है हिन्दोस्तां हमारा।”

मेरे सपनों का भारतवर्ष- आर्थिक समृद्धि-

मै सोचता हॅू मेरा भारत पुनः सोने की चिडिया बन जाये। यहाॅ कोई भूखा न रहे। प्रत्येक प्राणी के तन पर वस्त्र हो। प्रत्येक के पास रहने के लिये घर हो। गरीबी, बेरोजगारी, अशिक्षा, का नामोनिशान न रहे। भारत के प्राकृतिक संसाधन एक बार फिर से सम्पन्नता की मिसाल बनें। भारत की भूमि किसानों के पसीने से अनाज उत्पन्न करने लगे। और दूध की नदियाॅ सभी घरों की भूख-प्यास मिटाती रहे।मेरे सपनों का भारतवर्ष mere sapno ka bharatvars

मेरे सपनों का भारतवर्ष- आध्यात्मिक विकास-

भारत पूण्य भूमि है। आज भी विश्व में इसे आध्यात्म भूमि के रूप में जाना जाता है। मेरी कामना है कि मानव भौतिकतावादी सुखों को त्याग कर आध्यात्मिकता की ओर उन्मुख हो। मेरे मानस-पटल पर भावी भारत का जो चित्र है उसमें मैं अपने देश को समस्त विश्व में मंगल वर्षा करने वाले अक्षय लोक आलोक केन्द्र के रूप में देखता हॅू।

विश्वमंगलकारी भारतीय संस्कृति का प्रसार-

यह एक ऐसा भारत है जिसमें वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना चारों और है। प्राचीन काल से ही हमारे ऋषि मुनियों हमें विश्व कल्याण की सीख देते रहे हैं। आज हमें उनकी इस सीख पर चलने की जरुरत है। भारत भूमि से मानव कल्याण की कामना को व्यक्त करने वाली इन पंक्तियों को सभी भारतवासी समवेत स्वर में गा उठें-

“सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तुः मा कश्चिद दुख भाग्यभवेत्।।”

मेरे सपनों का भारतवर्ष- रामराज्य की स्थापना-

गोस्वामी तुलसीदास जी ने अपने महाकाव्य रामचरित मानस में कहा है-

“दैहिक दैविक भौतिक तापा।
रामराज नहिं काहुहिं व्यापा।।”

मेरे सपनों का भारतवर्ष- वैज्ञानिक विकास-

मैं चाहता हँू कि भारत विश्व में वैज्ञानिक उत्कर्ष का महानतम केन्द्र बने। यहाँॅ की शिक्षा का स्तर इतना उत्तम हो कि प्रत्येक बालक वैज्ञानिक सोच रखने वाला हो। हमारे देश में अनेक वैज्ञानिक साधनों का निर्माण एवं विकास हो। किन्तु इनके द्वारा विश्व-विनाश का नहीं अपितु विश्व शान्ति का द्वार खुले।

मेरे सपनों का भारतवर्ष- विश्व का आदर्श देश-

मेरे सपनों का भारत वह है जो राजनैतिक, आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, आर्थिक, वैज्ञानिक आदि विभिन्न हस्तियों के कर्मों द्वारा उत्कर्ष कोे प्राप्त हो। एक दिन भारत का प्रत्येक नागरिक सहर्ष यह गीत गा उठे-

“सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्ताॅ हमारा
हम बुलबुले हैं इसकी, यह गुलिस्ता हमारा।”

mere sapno ka bharatvars एक ऐसा हो जिसमें सभी नागरिक देश के प्रति और अपने सपनों के प्रति ईमानदार हों। मेरे सपनों का भारत mere sapno ka bharatvars की पूर्णता के लिये यह आवश्यक है कि हमारे देश का प्रत्येक नागरिक देश की प्रत्येक कुरीति को समूल रूप से नष्ट करने का संकल्प ले।मेरे सपनों का भारतवर्ष-11points mere sapno ka bharatvars-11points

तभी मेरे स्वप्न मूर्त रूप ले सकेंगे।

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नर हो न निराश करो मन को।

Gramin vikas aur Krisi

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