Category: poem

इंटरनेट पर कविता पढ़ने और शेयर करने का सबसे अच्छा माध्यम। मेरी स्वरचित रचनाएं।

पहाड़

मैंने सुना था पहाड़कितने विशालकाय हो तुम तुमने सहेज रखी हिमानियाँक्रम से सजा रखे जंगलतुमसे बहती असंख्य नदियाँधरा पर तुम करते मंगल मानव के अत्याचारों सेफिर क्यूँ इतने हो गुमसुमसमेट लो अपनी सारी संपदाजिसके हकदार हो तुम मानव मन बदल गया है अबपरिस्थिति बदल रही है आजकितने असहाय हो तुमसमझ नहीं पा रहा गिरिराज। – […]

सावन मुझको भाता है

बरसते हैं चिराग ए चिलमनदर्द कम करने के खातिरअब हृदय सूना सूनाही सावन मुझको भाता है, जैसे बरसते हैं सदा हीएहसास गहराइयों मेंऔर घुल जाती है इकमिठास अमराइयों में, मैं भिगा लेता हूँ नयनों कोसहारा बरसात का लेकरछोडकर मुझको बताभला सावन तू क्यूँ जाता है। -भानु प्रताप सिंह रावत

Back To Top
%d bloggers like this: