स्वस्थ रहने के 6 टिप्स

स्वस्थ रहने के 6 टिप्स

आयुर्वेद एक महान ज्ञान है। यह मानव देह और प्रकृति के रहस्यों के गहन अनुसंधान के सदियों लंबे संचय से प्राप्त वरदान है। इसकी शक्ति को हमें अवश्य जानना चाहिए। इसको नया रूप देना चाहिए। इसका विकास करना चाहिए। सबसे बड़ी बात यह कि भारत जैसे विशाल और विविध प्राकृतिक संसाधन वाले देश में आयुर्वेद के लिए बड़ी संभावनाएं हैं, तथा साधन विहीन गरीब जनता के लिए इसकी महती उपयोगिता भी।

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भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। पश्चिमी समाज के सामने अब तक इस महान राष्ट्र के प्रचलित छवि रही है- सांपों, मदारियों, साधुओं, गरीबों का देश। परंतु अब तस्वीर बदल रही है। भारत सबसे बड़ा बाजार बन चुका है और अपनी अर्थव्यवस्था क्रय शक्ति के चलते मजबूत देश भी है। आयुर्वेद के प्रति भारत में ही नहीं विदेशों में भी लोगों का रुझान बढ़ा है।

किसी बहुत बड़े डॉक्टर ने अपनी पुस्तक में लिखा है कि आने वाले भविष्य में लोगों को जो भोजन करना चाहिएए उसमें 50 प्रतिशत फल, 35 प्रतिशत साग-सब्जी, और 15 प्रतिशत अन्न होना चाहिए। इस तरह के भोजन से आने वाले समय में हर तरह के रोगों से लड़ा जा सकता है। वैसे भी कहा जाता है कि कड़वी दवाइयों से रोगों का निदान करने से अच्छा है कि किसी भी व्यक्ति के रोग को सिर्फ फल से दूर किया जाए। इस लेख में हम आपको ऐसी ही कुछ जानकारियों से रूबरू करायेंगे।

  1. सेहतमंद संतरा
  2. हल्दी के फायदे
  3. पानी ही जीवन
  4. लाभदायक है पालक
  5. खट्टे फलों का सेवन
  6. मिठास दिलाये गुस्से से छुटकारा

1- सेहतमंद संतरा

अच्छे स्वास्थ्य के लिए विटामिन सी की गोलियां लेने से संतरा खाना ज्यादा बेहतर है। जर्नल ऑफ फूड साइंस के मुताबिक संतरे में एंटीऑक्सीडेंट्स मौजूद होते हैं और यह बुढ़ापे की लकीरों को दूर रखने के साथ दिल की बीमारी और कैंसर से भी रक्षा करते हैं।

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अमेरिका के ब्रिग्हेन यंग विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर टोरी पार्कर विटामिन सी का एक कैप्सूल लेने से बेहतर है कि एक संतरा रोज खाएं।

पार्कर उनके साथियों का कहना है कि संतरे में मौजूद फिनोलिक यौगिकों में एंटीऑक्सीडेंट्स व कीटाणुओं के संक्रमण को दूर करने के लिए वाले गुण होते हैं।

2- हल्दी के फायदे

हल्दी के सेवन से दिल के दौरे में कमी आती है। हल्दी में मौजूद एंटी ऑक्सीडेंट और एंटी इंफ्लेमेटरी गुणों के कारण इसके प्रयोग से दिल के ऑपरेशन के बाद पढ़ने वाले दौरे का खतरा कम हो जाता है। हल्दी के सेवन से दिल के दौरे में 65 फ़ीसदी तक कमी आ सकती है।

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हृदय की धमनियों में रक्त प्रवाह सामान्य करने के लिए बाईपास और ऑपरेशन किया जाता है। सामान्य तौर पर इस ऑपरेशन के दौरान हृदय की गतिविधियां ठप रहती है। रक्त प्रवाह बंद होने के कारण हृदय को क्षति पहुंच सकती है और मरीज को भविष्य में दिल के दौरे आ सकते हैं।

नए अध्ययन में यह तथ्य सामने आया कि पारंपरिक दवाओं के साथ हल्दी देने से ऐसे खतरे को कम किया जा सकता है। वैज्ञानिक पत्रिका अमेरिकन जर्नल ऑफ कार्डियोलॉजी की रपट के अनुसार इस शोध के नेतृत्वकर्ता व थाईलैंड की वानवरंग वोंगचेरोइन ने कहा कि इन परिणामों की दोबारा पुष्टि करने की जरूरत है। विश्वविद्यालय ने 2009 से 2011 के मध्य ऑपरेशन करा चुके 121 दिल के मरीजों पर अध्ययन किया। इसमें आधे मरीजों को ऑपरेशन से 3 और 5 दिन बाद तक दिन में चार बार एक 1 ग्राम हल्दी के कैप्सूल दिए गए।

3- पानी ही जीवन

शरीर में पानी की थोड़ी सी भी कमी आपको चिड़चिड़ाए परेशान और बीमार बना सकती है। यूनिवर्सिटी ऑफ कनेक्टिकट ;यूकॉनद्ध की प्रयोगशाला में हुए परीक्षा हुए परीक्षणों से यह तथ्य सामने आया कि यदि कोई व्यक्ति 40 मिनट तक टहले या बैठकर आराम करेए दोनों ही स्थितियों में पाने की थोड़ी सी भी कमी के समान प्रभाव होंगे।

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ब्रिटिश जर्नल ऑफ न्यूट्रीशन की रिपोर्ट के अनुसार हल्के निर्जलीकरण को शरीर में पानी की सामान्य मात्रा में 1.5 प्रतिशत की कमी के रूप में प्रकाशित किया गया है।

यूकॉन्स नेग स्कूल ऑफ एजुकेशन में के प्रोफ़ेसर लारेंस ई आर्मस्ट्रांग ने बताया कि इन परीक्षणों से यह स्पष्ट होता है कि अभ्यासए अत्यधिक गर्मीए व परिश्रम करने के वक्त ही नहीं बल्कि सामान्य अवस्था में भी शरीर में पानी की सही मात्रा का महत्व है। आर्मस्ट्रांग ने कहा कि शरीर में एक या दो फीसदी पानी की कमी होने पर मनुष्य को प्यास लगती है। उन्होंने यह भी बताया शरीर में पानी की कमी सभी लोगों को प्रभावित करती है। पूरा दिन कंप्यूटर पर काम करने वाले लोगों के लिए भी शरीर में पानी की मात्रा सही रखना लंबी दौड़ लगाने वाले खिलाड़ियों जितना ही जरूरी है।

4- लाभदायक है पालक

पालक में पाए जाने वाले नाइट्रेट आपकी वृद्धि के साथ ही आपको मजबूत बनाते हैं। आम धारणा यह है कि लोह तत्व के कारण पालक लाभकारी होता हैए लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि इसमें पाए जाने वाले नाइट्रेट इससे भी ज्यादा लाभकारी हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि पत्तेदार सब्जियों में प्रचुर मात्रा में पाए जाने वाले नाइट्रेट जीवकोषों को मजबूत बनाते हैं और इन्हीं से हमें ऊर्जा प्राप्त होती है।

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पालक हमारे शरीर को उन जरूरतों से संचित करता है जिनके माध्यम से हमारे शरीर का विकास होता है। यह हमारे शरीर की कोशिकाओं को जरूरी इंधन देता है।

मेटाबाॅलिज्म नामक जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट में कहा गया है कि अभी कुछ समय पहले तक यह समझा जाता था कि नाइट्रेट में शरीर को फायदा पहुंचाने संबंधी कोई गुण नहीं होता है। स्वीडन के वैज्ञानिकों का मत है कि अकार्बनिक नाइट्रेट का 3 दिनों तक थोड़ी.थोड़ी मात्रा में भी सेवन करना बेहद फायदेमंद रहता है। वैज्ञानिकों के अनुसार पथ्य नाइट्रेट शरीर में नाइट्रिक ऑक्साइड की मात्रा बढ़ाता है। इसका काम रक्त नलिकाओं को खोलना और रक्तचाप की संभावना को कम करना है। इससे हमारे शरीर में रक्त संचार बेहतर होता है।

5- खट्टे फलों का सेवन

नींबू और आंवले जैसे खट्टे फलों में पाए जाने वाले यौगिक, महिलाओं में हृदयाघात का खतरा कम करते हैं। इसका खुलासा ब्रिटेन में यूनिवर्सिटी ऑफ एंगलिया में हुए एक शोध से हुआ है, शोधकर्ताओं ने देखा कि किस प्रकार फलों, सब्जियों, चॉकलेट तथा रेड वाइन में पाए जाने वाला फ्लेवनाॅयड्स हृदयाघात का खतरा कम करता है।

प्रमुख शोधकर्ता एडिंग कैसिडी के अनुसार. शोध में पाया गया है कि अधिक मात्रा में फलों, सब्जियों और खासकर विटामिन सी वाले पदार्थों के सेवन से हृदयाघात का खतरा कम होता है।

शोध रिपोर्ट जनरल ऑफ द अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन में प्रकाशित हुई है। कैसिडी और उनके सहयोगियों ने स्वास्थ्य से संबंधित पिछले 14 साल के आंकड़ों के अध्ययन के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला।

इसमें उन 69622 महिलाओं के खान-पान से संबंधित आंकड़े शामिल थे, जिसमें उन्होंने अपने खान-पान में शामिल किए जाने वाले फलों तथा सब्जियों के बारे में विस्तृत जानकारी दी थी। शोधकर्ताओं ने पाया कि खट्टे फलों में पाए जाने वाले फ्लेवनाॅयड्स का सेवन करने वाली महिलाओं में हृदयघात का खतरा अपेक्षाकृत 19 प्रतिशत कम होता है।

6- मिठास दिलाये गुस्से से छुटकारा

यदि आपको बात बात पर गुस्सा आता है और आप अक्सर नाराज या तनाव में रहते हैं तो चीनी खाना आपके लिए लाभदायक हो सकता है। एक नए अध्ययन में इस बात का खुलासा हुआ है कि शरीर में शर्करा की अधिक मात्रा गुस्से को नियंत्रित करने में मदद करती है।

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अमेरिका के ओहियो स्टेट विश्वविद्यालय ने अपने विद्यालय में अपने अध्ययन में खाने-पीने की मीठी चीजों का इस्तेमाल न करने और मीठे पेय पीने वाले लोगों के व्यवहार की तुलना की। उन्होंने देखा कि मीठे पेय पीने वाले लोगों को गुस्सा कम आता है। एग्रेसिव बिहेवियर जर्नल के अनुसार शोधकर्ताओं का मानना है कि खून में मौजूद गुलकोज से मस्तिष्क को ऊर्जा मिलने की वजह से गुस्सा कम आता है।

समाचार पत्र डेली मेल के अनुसार अध्ययन करता ब्रेड बुशमैन कहते हैं कि गुस्से के आवेगो को नियंत्रित करने के लिए आत्म नियंत्रण की आवश्यकता होती है और आत्म नियंत्रण के लिए बहुत सी ऊर्जा चाहिए। मस्तिष्क को ग्लूकोज से यह ऊर्जा मिलती है। बुशमैन कहते हैं कि मीठे पेय पदार्थों से यह ऊर्जा जल्दी मिलती है। बुशमैन जल्दी नाराज होने वाले लोगों के लिए ग्लूकोज आधारित उत्पादों का निर्माण बढ़ाने पर जोर देते हैं।

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